भीतर दीप जगाना होगा  (सम्पादकीय)

भीतर दीप जगाना होगा (सम्पादकीय)

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (प्रधान संपादक)

आप सभी को सपरिवार दीपावली, गोवर्धन, भैयादूज, छठपर्व की हार्दिक बधाई एवं मंगलकामनाएं ।
दिवाली, दीपों का पर्व है, अन्धकार को मात देती रौशनी के दीपों को प्रज्ज्वलित कर हम अपने आस–पास के रौशनी से जगमगा देते हैं । बम–पटाखों– फुलझड़ियों के मा/यम से अपनी प्रसन्नता और आनन्द को व्यक्त करते हैं । इस बार यदि लघु एवं मध्यम वर्ग के व्यापारियों की मन की बात सुनते हैं तो मंदी का नाद सुनाई देता है जो कहां जाकर रूकेगा ये कुछ स्पष्ट नहीं है ।
मौसम बदला वातावरण में नमी का आभास प्रारम्भ हो गया है । ऊपर से हरियाणा, पंजाब के किसानों द्वारा पराली जलाए जाने से दिल्ली–एनसीआर का वातावरण बहुत प्रदूषित होता जा रहा है । हालांकि दिल्ली सरकार भी इससे निपटने हेतु लगातार प्रयासरत है किंतु यह समस्या हमारी है और इसके भागीदार हम भी हैं इसलिए केवल सरकारी वायदों और क्रियाकलापों के भरोसे बैठे रहे तो शायद देर भी हो सकती है जागने में । इसलिए व्यक्तिगत तौर पर सभी को जिम्मेवारी लेनी होगी तब कहीं हम स्वच्छ–वातावरण में रहने की कल्पना कर पाएंगे ।
महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा चुनाव सिर पर हैं । सभी पार्टियाँ अपना दम–खम दिखा रही हैं, अपने को कमतर कोई नहीं आंकता है । विज्ञापन–प्रलोभन–लोपलुभावन वायदों को सुनकर अपने विवेक का भी प्रयोग करना है ।
एक बार आपका निर्णय मतपेटी या ईवीएम के भीतर बन्द हो गया फिर स्वीकार करना ही हमारे पास एकमात्र् विकल्प होता है । पांच साल तक आप अपनी, अपने क्षेत्र् की, अपने प्रदेश की बागडौर सौंपने जा रहे हैं, इसलिए निर्णय सजगता से, बुद्धिमता से करना है तभी सबका भविष्य सुरक्षित होगा । दीप की रौशनी को बाहर ही नहीं भीतर भी जगमगाना होगा तभी हम सही और गलत में अंतर समझ सकेंगे ।

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