माँ (कविता-6)

माँ (कविता-6)

वो कहते हैं हमने भगवान नहीं देखा

मैं कहता हूँ मेने देखा हैं

जब मुझे तकलीफ होती हैं तो मेरी माँ रोती हैं

मैं दुनिया का सबसे हसीं लाडला हूँ

मेरी शैतानियों का कोई ठिकाना नहीं

वो माँ ही तो हैं जो हमारे हर किरदार से प्यार करती हैं    किसी भी उम्र मे मुझे डांट लगा देती हैं

वो माँ ही तो हैं जो हमें सही रास्ता दिखाती हैं

स्कूल से थक कर जब मैं घर को आता हूँ

भूख के मारे जब हालत खराब होती हैं

वो माँ ही तो हैं जो हमें अपने हाथों से खाना खिलाती हैं

दुनिया से हार गया हूँ ये कहकर मैं टूट चूका हूँ

नींद जब दूर चली जाती हैं

वो माँ ही तो हैं जिसके गोदी मे सर रखके मुझे नींद आती हैं

वो हिसाब से पैसे देना कहीं मैं बिगड़ न जाऊ

वो हर घडी मेरी फ़िक्र करना कहीं मैं खो न जाऊ

वो माँ ही तो हैं जो हमपे जान देती हैं

मेरी हर जीत पे वो ताली बजाती हैं

मेरी हर हार पर मेरी हार का मतलब बताती हैं

वो माँ ही तो हैं जो हमें होंसला देती हैं

मेरे पास भगवान है क्युकी वो माँ ही तो हैं जो हमारी मुश्किल दुनिया को आसान बनाती हैं

(अभिषेक तिवारी)

Special Article कविता और कहानी