राफेल की नींबू – मिर्ची

राफेल की नींबू – मिर्ची

अपने देश के भीमकाय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह  जी ने  राफेल को छोटा सा नीबू क्या चढ़ाया  बाकी कांग्रेसियो को बड़ी सी मिर्ची लग गयी । अजीब बात है कुछ ना मिले तो नीबू मिर्ची को ही राष्ट्रीय मुद्दा बना दो और फिर अंधविश्वास – अंधविश्वास करके पूरे भारतीय संस्कृति का सत्यानाश कर दो । कब सीखोगे विपक्ष वालों की तुम्हारी इन्ही कमियो का सीधा फायदा उठाकर मोदी आज मोदी जी हो गए । वैसे छोटे-बड़े दुकानदार अपनी दुकान के शटर पर शनिवार के दिन एक धागे में पिरोई सात मिर्च और एक नींबू लटका देते हैं , तर्क ये दिया जाता है खट्टा और तीखापन मिलकर बुरी नजर वाले का ध्यान भंग कर देते हैं इसलिए घर हो या दुकान ऐसे कई प्रतिष्ठानों पर शनिवार के दिन नींबू-मिर्च को सूली पर लटका दिया जाता है।

 कह सकते हैं अचार, सलाद, चटनी और मसालों में चटपटे स्वाद के लिए प्रयोग में लाई जाने वाली हरी मिर्च अंधविश्वासी लोगों के लिए भी बड़े काम की चीज है। पर यही मिर्च अगर राजनीति मे आ जाये तो बहुत तेज लगती है । अब एकदम आंखों देखी कथा सुनिए। घर के पास ही एक पढ़ा लिखा युवक सब्जी बेचने का काम करता था। इसके अलावा अपने घर पर तांत्रिक क्रिया से पारिवारिक हो या व्यापारिक, तमाम समस्याओं से मुक्ति दिलाने का कष्ट निवारण केंद्र चलाता था ।दूर-दूर से लोग अपनी समस्या लेकर उसके पास आते थे। तंत्र-मंत्र में फंसे एक अन्य मित्र की कहानी तो इतनी उलझी कि पहले तो वह खुद दो के चार करने की गफलत पाले इस दलदल में डूबा उसके बाद उसका घर, उसकी गली, सारे पड़ोसी और देखते ही देखते 2-3 वर्षों में पूरा इलाका अंधविश्वास के गर्त में समा गया। किसी के घर बुधवार तो किसी के घर गुरुवार को गद्दी लगने लगीं। कुछ घंटों में तमाम बाबाओं की आत्माओं का आना-जाना होता, चढ़ावा चढ़ता और खेल खत्म हो जाता । समझ से परे है कि बात जब धर्म से जोड़ दी जाती है; तब क्यों आँखें बंद करके लोग अज्ञानी बाबा तांत्रिकों की हर बात मान लेते हैं। तंत्र-मंत्र और टोना-टोटके करने वाले जाहिल लोगों की बातों में आकर न जाने कितने घर बर्बाद हो जाते हैं।

दरअसल, जहां मूर्खता का साम्राज्य होता है, वहां अंधविश्वास फलता फूलता है किन्तु जहाँ चेतना हो संस्कार हो वहाँ नीबू भी बड़े बड़े धुरंधरों को राफेल के पहिये के नीचे ला देता है । चमत्कार जैसी कोई चीज नही होती, अगर है तो हर चमत्कार के पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण है। जाहिर सी बात है; हर इंसान किसी न किसी समस्या से दुखी है जैसे कांग्रेसी मोदी जी एंड कम्पनी से  और लोग इसी दु:ख को दूर करने के लिए बाबाओं और तांत्रिकों के जाल में फंस जाते हैं जैसे दिग्गी भैया कम्प्यूटर बाबा के जाल मे फंसे । तांत्रिक लोगों से दावा करते हैं की वह समस्त दुखों का अंत तांत्रिक विधि से कर देगें और तांत्रिक की बातों पर यही अंधा-विश्वास छले जाने का कारण बनता है। अगर नीबू, हरी या काली मिर्च और बताशों से समस्याएं हल हो जातीं तो बिना किसी नुक्सान के कश्मीर का हल अब तक निकाला जा चुका होता, ये पाखंडी कम्प्यूटर लेपटॉप और मोबाइल जैसे बाबा देश सेवा में योगदान दे रहे होते, जोकि असंभव है। विक्रम लैंडिंग के समय इसरों के सम्पर्क से बाहर हो गया और भटक गया, अगर इसरो के वैज्ञानिक ऐसे तांत्रिकों के पास जाते तो समय रहते वह मिल गया होता और नींबू मिर्च लटका देता तो क्या मिशन सफल हो जाता ?

 क्योंकि ये तो दिन-रात भगवान या आत्माओं के सम्पर्क में रहते हैं दिन, महीने, साल, मिनट, घंटे और पूरे ब्रह्माण्ड सहित सूरज-चांद-सितारे सब कुछ तो उनकी मुठ्ठी में है। इन बाबाओं और फकीरों से महिलाओं को तो खास तौर पर सतर्क रहने की आवश्यकता है। क्योंकि सबसे ज्यादा ठगी के शिकार महिलाएं ही होती है। कई बार देखा है; घर से पुरुष के निकलने के बाद दोपहर के समय इस तरह के ठग..बाबा बनकर घर-घर फेरा लगाते हैं, और अपनी लच्छेदार भाषाजाल में फंसाकर ये अपना मकसद सिद्ध कर लेते हैं। टीवी चैनलों के हाईफाई बाबाओं का प्रोग्राम तो कतई न देखें। मुसीबत के समय धैर्य से काम लें  न कि किसी के बहकावे आकर अंधविश्वासी बनें, अंधविश्वास को बढ़ावा न दें।

अब आंखों देखी दूसरी कथा सुनिए। वर्ष 2017 में बोटनीकल गार्डन से कालकाजी के बीच मेट्रो लाइन के उद्घाटन के वक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोएडा न आने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्रियों के ऊपर कटाक्ष करते हुए कहा था कि ”हम टैक्नोलॉजी के युग में जी रहे हैं, विज्ञान के युग में जी रहे हैं” उन्होंने कहा एक मुख्यमंत्री ने एक कार खरीदी और उसके ऊपर नींबू-मिर्ची और न जाने क्या क्या लटका दिया था और उक्त मुख्यमंत्री पर हंसते हुए प्रधानमंत्री ने कहा था कि ”ऐसे नेता देश को क्या प्रेरणा देंगे।” आदरणीय प्रधानमंत्री जी का भाषण सुनकर मुझे बेहद खुशी मिली थी। लेकिन इसी विज्ञान के युग में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने दो वर्ष पूर्व कही गई प्रधानमंत्री की बात को काटते हुए विमान के पहियों के नीचे नींबू रखकर उसका पूजन किया किन्तु यह सही है क्योंकि ये हमारी संस्कृति है इसी से हम पहचाने जाते है । अब समझ में आ जाना चाहिए  कि कार और लड़ाकू विमान में क्या फर्क हैं एक हवा में उड़ेगा एक जमीन पर चलेगी एक को हमने नींबू मिर्च इसलिए लगाया की लोग देखे और जले और दुसरे मे इसलिए की भारत देश शास्त्रो और पुराणों का अद्वितीय देश है   इस बात के समर्थन में हरियाणा की एक रैली में गृहमंत्री अमित शाह ने इस पूजन को भारतीय संस्कृति बताते हुए इस पूजन का गुणागान कर दिया जो बिल्कुल सही था । अंधविश्वास और भारतीय रीति – रिवाज मे अंतर करना सीखिये । हमे गर्व है की हम भारत के नागरिक है । जय हिन्द ।

—– पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी 8808113709

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