व्यंग्य लेख : वैक्सिनेशन के लिए यथार्थवाद !

व्यंग्य लेख : वैक्सिनेशन के लिए यथार्थवाद !

नेता क्रिकेटर और एक्टर ये तीनों देश के सबसे महत्वपूर्ण वेस्ट मटेरियल है जिन्हे शीघ्रातिशीघ्र निर्यात करने की जरूरत है । अभी हाल ही में आपने देखा होगा सोयाबीन फार्च्यून आयल का एक एड आता था ,जिसमे अपने एक्स क्रिकेटर दादा मतलब सौरव गांगुली बड़े गर्व से फार्च्यून का डिब्बा उठाकर कहते थे ,इस्तेमाल कीजिए सोया ब्रांड फार्च्यून आयल और कोलेस्ट्रॉल मुक्त जीवन के साथ हर्ट अटैक जैसे खतरों से निजात पाइए किन्तु अचानक सौरव गांगुली को हार्ट अटैक आ गया और दादा अब अाई सी यू में है । भगवान करे जल्दी ठीक हो जाए पर फिर पैसे के लिए कोई झूठा विज्ञापन ना करें । ये नेतागिरी भी बड़े काम की चीज है अब अपने अखिलेश यादव भैया को ले लीजिए ,पढ़ाई ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी में कर आए राजनीति में आते ही अंगूठाछाप हो गए । आजकल उन्हे हर जगह बी जे पी दिखाई देती है । अभी हाल ही में करोना कि दवा को बी जे पी वैक्सीन बोल गए । और तो और मजेदार तब हो गया जब बोले नहीं लगवाऊंगा क्युकी इसमें जादू टोना है । ये तो  नेता है , एक झटके में करोड़ों कमा लेता है ,और इलाज में खर्च भी कर देगा पर इनके पीछे दौड़ते वालों तुम्हारा क्या होगा ? कई भ्रष्ट विधायक ऊपर से शरीफ और कामगार दिखते है पर कई साइड बिजनेस में सरकार का पैसा इन्वेस्ट करके दो नंबर का माल कमा कर जनता को बेवकूफ बनाए रखता है । राजनेता धांधली और कमिशन  से कमाए नोटों के बिस्तर पर सोते सोते बीमार हो गए और बेमौत चल बसे , कुछ अभी भी जेल में पड़े है और कुछ तो अभी जनता के बीच उन्हे उल्लू बनाकर जय जयकार करवा रहे । हिन्दुस्तान की राजनीति और राजनेताओं का जमीर अगर जिंदा रहता तो आज भारत शिखर पर होता संन 1970  के दौर तक ज्यादातर जनप्रतिनिधि अपनी योग्यता ,कर्मठता,, सुचरित्र ,

के बल पर लोगो का विश्वास  जीतने की कोशिश करते थें हालाकि तब भी कुछ भ्रष्ट  नेता लंगोट के कमजोर होने की वजह से बदनाम थे । आप लोग भी उन्हें जानते होंगे । भ्रष्टचार तब भी था लेकिन उतना नहीं जितना आज है आज जनता के पैसे को नेता लोग पद पाते ही हड़पने की योजना बनाने लगते है देश या जनता का भला उनकी प्राथमिकता नहीं होती है।राजनीति आज उद्योग सा बन गया है चुनाव जीतते ही उनका सबसे पहला लक्ष्य अंधाधुंध पैसा कमाना होता है ,पिछले कई दसकों से मैंने देखा है कि कुछ नामी डकैत ,गुंडे ,बदमाश,माफिया , जातिवादी संगठन बना कर पार्टियों  को ब्लैकमेल करते है । ऐसे गिद्धों को भी राजनीतिक दलो ने चुनाव जीतने को टिकट दिए , आज भी दे रहे है । ये सब क्या इससे देश का विकास होगा या देश डूबेगा आप भी जानते है और मै भी क्या है ये सब घोटालों के लिए गैंग बनाया जाता है कोई राजनीति दल नहीं ।                 

        कुछ वर्ष  पहले की बात है कुछ महिलाएं चंदा मांगने आई थी जो राजनीति से जुड़ी थी उनमें से एक दो महिलाओं से मेरी बातचीत हुई तो वो अपने आप को नेता जी की पसंद बता मंद मंद मुस्करा रही थी बता रही थी कि जब भी उनके पास जाते है ना नेता जी अपने पास ही सुलाते है ।  कभी कोई काम हो तो बताना ।हमारे पास हर उम्र की औरत है ,जो कहोगे सब हो जाएगा । क्या राजनीति में ज्यादातर औरतें घरवालों की मर्जी के बगैर आती है या मजबूरन या शौकिया या समाज को अच्छी राह दिखाने के लिए  या किसी विशेष पद प्राप्ति के लिए या सब कुछ दांव पर लगा जीवन को स्वाहा करने के लिए ? अपने को सब नेता ईमानदार ,चरित्रवान , कर्मठ,कहते है दूसरों को बेईमान और जनता को वो पागल समझते है मतलब हो तो पैरो में पड़ जाते है नहीं तो भूल जाते है ।आजकल जनता सब समझ भी गई है लेकिन फिर भी सुधार नहीं हो पा रहा है ।क्यों ? दोस्तो ।जब तक हमारे राज नेता देश भक्त,ईमानदार ,योग्य ,कर्मठ, चरित्रवान नहीं होंगे तब तक देश का विकास कैसे संभव है जरा सोचो हम कब तक गुमराह हो नेताओं का प्रचार कर उन्हें सर पर बिठाते  रहेंगे ? वैसे कुम्हार के गधों की कहानी तो आपने सुनी ही होगी कि ,धोबी जब घाट पर जाने के लिए गधे की पीठ पर कपड़ों की गठरी रखता था और किसी बात पर अपनी लड़की से नाराज़ होता था तो वो लड़की से कहता था कि तू सुधर जा नहीं तो तेरी शादी इस गधे से कर दूंगा तो गधा उम्मीद कर खुश हो उठता था ।।झूमता रहता था वैक्सीन आने के नाम पर आज की जनता का भी हाल कुछ ऐसा ही  है । मेरी और आपकी राजनेताओं से कोई रिश्तेदारी या दुश्मनी तो नहीं फिर भी नोक झोंक हो ही जाती है क्यों ? क्योंकि हम आप ईमानदार है और उसी चस्में से सबका आंकलन करते है ।

      ___ पंकज कुमार मिश्रा, ( सह संपादक,

      पत्रकार एवं शिक्षक, केराकत जौनपुर  उत्तर प्रदेश

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