💐  जिन्दगी-अनबूझ पहेली  💐

💐 जिन्दगी-अनबूझ पहेली 💐

जिन्दगी इतनी सरल तो कभी भी नहीं थी,कठिनया ऋजु भी रही।लोगों के लिये तो यह ऐसी पहेली जिसको सब ने अपने अपने ढंग से हल करना चाहा,पर वो बिना हल हुएफिसलती रही,मचलती रही।जिन्दगी के अर्थ कोजिसने भी सिर्फ अर्थ में ही ढूंढना चाहा,उसकी जिन्दगी अर्थहीन हो कररह गई।जिन्दगी के अर्थ का वास्तविक मज़ा तोसन्तुष्टि में है,जहाँ व जिसस्तर पर हो जाये।जिसे  कल की आजीविका काभी पता न हो,वह यदि सन्तुष्ट प्रवृति का हो तो वह गहरी नींद सोता है वएक वह जो अरबों खरबोंकी सम्पत्ति का मालिक हैवह वर्तमान से सन्तुष्ट न होने पर नींद की गोलियांखा कर भी चैन से सो नहीं पाता।जो चाहा कभी पाया नहीं,जो पाया कभी सोचा नहीं,जो सोचा कभी मिला नहीं,जो मिला रासआया नहीं,जो खोया वो याद आता है,जो पाया सम्भाला जाता नहीं,क्योंअजीब सी पहेली है न ये जिन्दगी!जिसको कोई भी सुलझा पाया नहीं । जीवन में समझौता बड़ीबात नहीं,क्योंकि झुकता वही है जिसमें जान होतीहै,अकड़ तो मुर्दे की हीपहचान होती है।जिन्दगीजीने के दो तरीके-जो पसन्द है उसे हासिल  करना सीख ले ओर जो हासिल है,उसे पसन्द करना सीख ले। जिन्दगीजीना आसान नहीं,बिनासंघर्ष किये बना कोई महान नहीं। जिंदगी तोहंसाती भी है, रुलाती भीहै, परन्तु जो हर हाल मेंखुश रहते हैं, उसके आगेजिन्दगी भी सर झुकाती है।पर आज पूरे विश्व में लाखों लोगों को लील चुकी अदृश्य महामारी से जन्मी मौत की सिहरन नेबड़ी बड़ी महाशक्तियों को घुटने पर ला दिया है।एक तरह से जिन्दगी की सभी गतिविधियों पर तोलग्गम ही लगा दी है।इंसान घरों में कैद हैं वपंछी स्वछन्द।एक अजीब से कशमकश,असमंजसऔर अविश्वास से परिपूर्णवातावरण का ये हाल है कि-“अब नहीं कोई बातखतरे की,अब सभी कोसभी से खतरा है।””जो कहते थे, मरने तक की फुर्सत नहीं,वो आज मरने के डर से फुर्सत मेंबैठे हैं।””एक मुद्दत से आरज़ू थी,फुर्सत की,मिली तो इस शर्त पे,कि किसी से नमिलो।”जिन्दगी की हलचल पर,खुशियों पर कब तक  ग्रहण लगा रहेगा, कुछ भी नहीं पता,बचाव औरसावधानी को जिन्दगी जीलेने का पर्याय आखिर कब तक मानें।अनिश्चयका वातावरण असुरक्षा,भय, डर  से भर देता है।अभी तो लंबे समय तकइन हालातों से जूझना है व जीने की जिजीविषा को बनाये रखना है।बसअपने विश्वास को नई ऊर्जा,संयम,आशा के बलपर डगमगाने नहीं देना।ये बादल भी छंटेंगे औरफिर से खुशहाली व उम्मीद का सूरज अपनीचमक से जिन्दगी को एकनया रूप देगा।जरूरत के मुताबिक जिंदगी जिओ,ख्वाहिश के मुताबिक नहीं,जिनकाकभी कोई अंत नहीं। यादरहे,ईश्वर का दिया अल्प नहीं,टूट जाये वो संकल्पनहीं।जिंदगी में सबसे बड़ा प्रयास यही हो किहमारी वजह से किसी कीआंख में आंसू न आएं।जो बाहर की सुनता है वोबिखर जाता है, जो भीतरकी सुनता है,वो संवर जाता है।अपनी जिंदगी  की तस्वीर में मनभावन रंग तो हमको ही भरने है।दुनिया बुरी है, सब जगह धोखा है, लेकिन हम अच्छे बनें,किसने रोका है।दूसरों को सुनाने के लिये अपनी आवाज़ ऊंचीमत  करो बल्कि अपना व्यक्तित्व इतना ऊंचा बनाओ,आपको सुनने केलिये लोग इंतज़ार करें।गर आप ऐसे बन गए तोसमझिये आपने जिन्दगी की पहेली को हल कर दिया,अनबूझ पहेली को सुलझा दिया।आपकीजिन्दगी हर परिस्थिति मेंआपका स्वाभिमान है वदूसरों को आप पर गर्व है,अभिमान है।-राजकुमार अरोड़ा’गाइड’

Special Article कविता और कहानी