‘सबसे पहले देश हित’ : सम्पादकीय

‘सबसे पहले देश हित’ : सम्पादकीय

मनमोहन शर्मा ‘शरण’ (संपादक).

आप सभी को ‘उत्कर्ष मेल’ (अनुराधा प्रकाशन) परिवार की ओर से प्रकाशोत्सव तथा गंगा स्नान (देव दीवाली) की अनन्त शुभकामना । हम सभी सभी के जीवन में ज्ञान रूपी प्रकाश आए तथा गंगा सा पवित्र् संकल्प प्राप्त करें और सबकी भावना यही हो हम जो भी कार्य करें उसमें यह भाव सदैव रहना चाहिए ‘सबसे पहले देश हित’
‘जय जवान जय किसान’ पूर्व प्रधानमंत्री , किसान पुत्र् श्री लाल बहादुर शास्त्री जी द्वारा दिया गया मात्र् एक नारा नहीं यह सच्चाई को दिखाता आईना है कि जब हमारो रक्षक एवं अन्नदाता उनकी जय अर्थात वे सुखी–संपन्न तथा संतुष्ट होंगे तभी देश खुशहाल / सम्रद्ध हो सकता है ।
जवान देश की सीमा रेखा पर बड़ी मुस्तैदी से सचेत, सजग रहते हैं तब हम चैन की नींद सो पाते हैं और अन्नदाता जीवन भर अपना पेट भले ही न भरे किन्तु देशवासियों के लिए अन्न उत्पन्न करता है । उन सभी की भूख शांत करने के लिए स्वयं दिन–रात अशांत रहता है । अशांत इसलिए कि कहीं आंधी, तूफान, बाढ़ आदि से, कीट पतंगों से फसल नष्ट न हो जाए । फसल अच्छी हुई तो उसके दाम सही मिलेंगे या नहीं । यह सब एक तरफ किन्तु धुन है कि चलते जाना है । क्योंकि जीवन चलने का नाम है ।
आज के परिवेश में यदि हम देखें तो एक तरफ कोरोना के कारण हमारी जीडीपी निचले स्तर पर है । फिर सरकार द्वारा कृषि कानून पर बवाल मचा या क्या मामला है, आज हमारे अन्नदाता ही सड़कों पर उतर आए हैं । उनका विरोध है कि किसानों के लिए बना कानून बिना उनको संज्ञान में लिए किस प्रकार उनके हित में हो सकता है ।
तरह–तरह के कयास लगाए जा रहे हैं इस पूरी किसान मूमेंट का मुखिया कौन है, क्या कोई बहला–फुसला रहा है । पर जो भी हो जब यह भनक लगी कि आन्दोलन की सुगपुगाहट हो रही है तभी किसानों के शिष्ट मंडल को बुलाकर आम सहमति का प्रयास किया जाना चाहिए था । आज बात आंदोलन की ही नहीं है बिना मास्क पहने हजारों किसान दिल्ली में, दिल्ली के आसपास डेरा डाले हैं जिसमें जरा सी चूक कोरोना संक्रमण को हवा दे सकती है ।

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