ये कैसा गणतन्त्र–कितना बदला स्वरूप

ये कैसा गणतन्त्र–कितना बदला स्वरूप

अब हमें 72वें गणतंत्र दिवस पर इस बात का गहनता से विचार करना है कि आज तक कितना स्वरूप बदला,बदला भी है, तो दिशा सकारात्मक है क्या? ये कैसा गणतंत्र है!इतनी अधिक जनसंख्या औऱ विविधता से भरे राष्ट्र में सबको साथ ले कर चलना,सब को बराबर मान-सम्मान देना,किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे,इसका ध्यान रखना बहुत जरूरी हैं। 26 जनवरी 1950 को जब भारत गणतंत्र बना तब भीम राव अम्बेडकर, मौलाना आज़ाद जैसे उच्च आदर्शों वाले लोगों की संख्या अधिक थी। देश भक्ति,निष्ठा,उत्साह अपनेपन का माहौल था एक कर्तव्यनिष्ठ, ईमानदार व्यक्ति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद हमारे राष्ट्रपति बने। लौहपुरूष सरदार पटेल के कारण भारत का एकीकरण हुआ। उस समय की अनसुलझी कश्मीर समस्या आज भी है।

पी ओ के पर पाक का ही कब्ज़ा है, घुसपैठ जारी है, धारा 370 हटने के बाद भले ही पूरा भारत अब एक जैसा हो गया हो, देशभक्ति की भावना का संचार हो गया,हालात पहले से सामान्य है, तो अब सभी के साथ पूर्ण सामंजस्य होना ही चाहिए। राष्ट्रभक्ति की भावना तो हर निवासी के दिल में होनी चाहिये पर उससे भी ऊपर साम्प्रदायिक सद्भावना का होना बहुत जरूरी है। हरेक के मन में भारतमाता के प्रति यह भावना होनी चाहिए-
“तेरी गौरव गाथा जननी,शतमुख शत शत बार कहें, तेरा वैभव अमर रहे माँ, हम दिन चार रहें न रहें।”

प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी ने उस समय की परिस्थिति के अनुसार सूझबूझ से विकास के मार्ग पर देश को आगे बढ़ाया। शास्त्री व इंदिरा जी ने राष्ट्र स्वाभिमान की रक्षा व विकास की निरंतरता को बनाये रखा। मिली जुली सरकारों में कुछ मुद्दे ठंडे बस्ते में डाल विकास कार्य होते रहे। लम्बे अंतराल के बाद पूर्ण बहुमत की सरकार मोदी जी के नेतृत्व में आई अब दूसरी पारी में हैं।

विदेशों में भारत का मान- अपमान बढ़ने के साथ यह भी जरूरी है कि देश के अंदर भी मतैक्य हो,समरूपता हो, आपस में प्यार हो। लोकतांत्रिक
मूल्यों का आदर हो। सिर्फ विरोध के लिये विरोध कटुता,वैमनस्य को
बढ़ाता हैं, राष्ट्रीय एकता भी तार तार होती हैं। प्रचंड बहुमत की महत्ता भी तभी है, जब अल्पमत की बात भी सुनी जाए, अन्यथा हर और उहापोह ,असमंजस दुविधा की ही हालत होगी जैसा अब पूरे राष्ट्र में हो रहा है।

इस बार का गणतंत्र दिवस तो किसान आंदोलन के साये में है,तीन कृषि कानूनों का पिछले 6 माह से विरोध हो रहा है, दो माह से तो दिल्ली के लगभग सभी बॉर्डर पर लाखों किसान धरना दे रहे हैं। कई दौर की वार्ता के बाद भी कोई हल नहीं निकला,दोनों पक्ष अपनी ज़िद पर है। गणतंत्र दिवस पर किसान दिल्ली में
ट्रैक्टर परेड करने को आमादा है। यह भी एक विडम्बना ही है 12 दौर की वार्ता के बाद भी हमारे भोले,मासूम,अनभिज्ञ कृषि मन्त्री तोमर जी किसानों से पूछते हैं कि तुम्हारी मांगे क्या क्या हैं?

इतनी कड़कती ठण्ड में खुले आसमान या टेंटों के नीचे रहने को लाखों किसान
मजबूर हैं। प्रचण्ड बहुमत के अहं में सरकार सिर्फ खानापूर्ति करती दिखाई देती है,यह कोई स्वस्थ लोकतन्त्र का संकेत नहीं है। यह संघर्ष लम्बा चला तो टकराव
की नौबत भी आ सकती है।इसे जल्दी हल करना ही होगा।नागरिकता कानून को ले कर भी सरकार मुस्लिमों को पूरी तरह आश्वस्त नही कर पाई थी।एन सी आर को ले कर भी ब्यानों की भिन्नता के कारण स्पष्टता नहीं दिखी।

अब यह बात बहुत सकून देती है कि पाकिस्तान को उसकी हरकतों का माकूल जवाब मिल रहा है, आतंकवाद में काफी कमी आई है, चीन भी पहले की तरह आंखे नहीं तरेर रहा,अन्य पड़ोसी देशों से हमारे सम्बन्ध अच्छे हैं, भारत की अब
एक उभरती हुई महाशक्ति के रूप में मान्यता हैं, बड़े बड़े अंतराष्ट्रीय मंचो पर उसकी बात सुनी जाती हैं। हर कोई मानता है कि भारत स्वयं में एक विस्तृत, व्यापक सम्भावना से भरा विशालकाय बाजार हैं, हर बड़ा देश टकटकी लगाये हमारे साथ सहयोग का उत्सुक हैं। यही हमारे विशाल गणतंत्र की महानता है।भले ही आज जी डी पी आज निचले स्तर पर है, विकास दर कम है, महंगाई बहुत बढ़ी है,बेरोजगारी का स्तर पिछले एक दशक में सब से कम है, यद्यपि पहले से पिछले छह माह में सुधार हुआ है।विश्व अर्थव्यवस्था को हम पर भरोसा है कि जल्द ही हम इससे निजात पा लेंगे,हमें भी भरोसा है अपने पर,अपने कर्णधारों पर।
“हम उफनती नदी हैं, हमको अपना कमाल मालूम है, हम जिधर भी चल देंगे,रस्ता अपने आप बन जायेगा।”

आज भारत विज्ञान, अंतरिक्ष, ऊर्जा, उद्योग, रक्षा हर क्षेत्र में विश्व में अग्रणी है। इसरो की आज,नासा की तरह विशिष्ट पहचान है। कोरोना महामारी का हमने डट
कर मुकाबला किया।बड़ी बड़ी महाशक्तियों के मुकाबले हमारी संक्रमित व मृत्यु
डर काफी कम रही। ठीक होने वालों का आंकड़ा 94 प्रतिशत से ऊपर ही रह।
कोरोना का टीका भी भारत की दो कम्पनियों ने ईज़ाद किया। अब सफल परीक्षण के बाद टीकाकरण विभिन चरणों मे शुरूहै। इन सब उपलब्धियों पर आज पूरे देश को गर्व है।

विश्व की चौथी महाशक्ति हम जल्द ही तीसरी महाशक्ति होंगे। आज पूरे विश्व में भारतवासियों को सम्मान व विश्वास की दृष्टि से देखा जाता है।सॉफ्टवेयर के क्षेत्र में तो अमरीका व चीन भी लोहा मानता है।हमारा भारत यूं ही महान राष्ट्र,महान गणतंत्र नहीं बना, इसमें लाखों स्वतन्त्रता सेनानियों,क्रांतिकारियों के अमिट बलिदान की अमर छाप है। स्वतन्त्र भारत के सभी नेताओं, सभी सरकारों, सभी समुदाय के लोगों का गतिशील,कर्मठ विशाल योगदान है,कोई भी यह नहीँ कह सकता कि हमने ही किया बस,बाकियों ने कुछ नहीं किया। राष्ट्र के अनवरत विकास में सभी पीढ़ियों का,हर समुदाय का, किसी न किसी रूप में बराबर योगदान है।

आखिर सब के ही सहयोग से तो सात दशकों से भी अधिक के समय में यह समृद्धि का विशाल वटवृक्ष खड़ा हुआ है। गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आओ शपथ लें कि हम दृढ़ विश्वास,मज़बूत इरादे के साथ, सभी भेदभाव को त्याग ,मिलजुल कर राष्ट्र को समृद्धि की नित नई नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे क्योंकि-
“बांधे जाते इंसान कभी,तूफान न बांधे जाते हैं, काया जरूर बांधी जाती,बांधे न इरादे जाते हैं”-
राजकुमार अरोड़ा’गाइड’
कवि,लेखक व स्वतंत्र पत्रकार
सेक्टर 2,बहादुरगढ़(हरियाणा)

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