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लघुकथा :- प्रेम दर्शन है प्रदर्शन नहीं

मनु एक मध्यम वर्गीय परिवार का लड़का है जो शहर में रहता है

उसे कॉलेज के पहले दिन से ही लावन्या नाम की एक ग्रामीण कन्या से प्रेम हो जाता है परंतु वह उस लड़की से प्रेम को अभिव्यक्त नहीं कर पाता है जिसका मुख्य कारण मनु का सहपाठी दोस्त रवि है जो उसे मुँह बोली बहन बना लेता है मनु यह जानता है कि यदि लावन्या और रवि को यह पता लगेगा की “मै लावन्या से अगाध प्रेम करता हूँ तो लावन्या अस्वीकार कर देगी और रवि से भी मित्रता हमेशा के लिए टूट जाएगी ।

मनु ने लावन्या का उपनाम आमोदनी रख दिया ।

मनु आमोदनी से बहुत प्रेम करता है यह बात कॉलेज के कुछ मित्रों और रवि को पता थी परंतु वे आमोदनी के वास्तविक नाम से अनभिज्ञ थे ।

मनु का यह मानना था कि एकतरफा प्रेम को स्वयं तक रखा जाए और वासना ना बनाकर प्रेम को दर्शन के रूप में समझा जाए तो प्रेम का वास्तविक अर्थ तभी जान पाएगा ।

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समय बीतता गया मनु, रवि और लावन्या का कॉलेज में अंतिम दिन था ।

मनु ने रवि को आमोदनी के विषय पर बात छेड़ दी ।

रवि ने कहा “यदि तुम लावन्या दीदी के बारे में यह सब सोच रहे हो तो एक बात याद रखना तुम बुरे पिटोगे ।

मनु ने कहा :- लावन्या के नाम का ही उपनाम है आमोदनी

प्यार किया है कोई गुनाह नहीं

रवि इतना सुनकर बौखला गया कि तेरी हिम्मत कैसे हुई यह सब सोचने की ।

मनु ने कहा प्रेम के लिए हिम्मत की नहीं दिल की भी जरूरत है जो तेरे पास तो है पर दिखावटी है ।

मनु की बात सुन रवि और मनु में झगड़े की स्थिति आ गयी । लेकिन वहाँ उपस्थित सभी मित्र रवि और मनु को बहुत सम्मान देते थे और उन्होने ने झगड़े से बचने के लिए बैठकर शांति पूर्वक बात हल करने को कहा ।

रवि ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मनु तुम आज के बाद लावन्या से कोई तालुक नहीं रखोगे और आमोदनी नाम से उसे कभी किसी के सामने नहीं कहोगे ।

मनु ने कहा आमोदनी नाम तो मैने रखा है अपनी प्रेमिका के लिए इसे नहीं बदलूगा ।

सभी दोस्तों के विचार विमर्श के बाद सभी इस नतीजे पर पहुँचे की

इस मामले में मनु की गलती है यह जानते हुए कि रवि उसका मित्र है और यह जानते हुए भी कि  वह रवि की मुँह बोली बहन है

मनु ने कहा यह सही है कि वह रवि की बहन है

लेकिन लावन्या रवि की बहन तो दूसरे सेमेस्टर  से बनी है जबकि मै उसे प्रथम सेमेस्टर से प्रेम करता हूँ ।

मनु की सारी बाते अस्वीकार कर दी गयी और फैसला रवि के पक्ष में गया कि मनु आज के बाद लावन्या से हमेशा के लिए कोई सम्बन्ध नहीं रखेगा और आमोदनी नाम का जिक्र भी कही नहीं करेगा ।

रवि और सभी मित्रो की संतुष्टि के लिए मनु ने बात मान ली । और इस किस्से को खत्म कर घर चला गया ।

रात में सोते हुए सारा किस्सा मनु की नजरो के सामने है आँखो आंसू है और एक प्रश्न स्वयं से पूछ रहा है

” मेरा प्रेम करना पूर्णतः गलत है या रवि का अपनी मुँहबोली बहन लावन्या का पक्ष लेना “

रचनाकार 

निहाल नवल

गाडरवारा

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