एक प्रधान मंत्री ऐसा भी (नरेंद्र दामोदर दास मोदी )

एक प्रधान मंत्री ऐसा भी (नरेंद्र दामोदर दास मोदी )
एक महान शक्सियत जिसकी हूँ, मैं भक्त जिसने मिसाल करी कायम
चाय बेचने से लेकर प्रधान मंत्री बनने का रखना दम,
जिसे विवेकानंद जी की किताबों ने दी प्रेरणा ,
पिलू फूल जैसे नाटक की नहीं की जा सकती कल्पना
पहुँच गए हिमालय करने अध्यात्मिक खोज
साधू संतों की सेवा के आगे नहीं था कोई होश ,
वकील साहब के संग का उन पर चढ़ा था ऐसा रंग
कि उंगली पकड़ उनकी एलान कर दी दुश्मनों के खिलाफ जंग ,
बारह साल की उम्र में ही पकड़ा मगरमच्छ
क्योकि समय आ गया था बदलने का मंदिर का ध्वज ,
चलता छप्पन इंच सीना तान कर मानवता की वो पहचान है
खोद कर बनाना जानते है जो रास्ते उन वीरो का प्रतिमान है,
गुजरात को बनाकर मिट्टी से सोना दिया नारी को सम्मान है,
कोने कोने तक पहुँचाई जान सुविधा, वहाँ कोई ना किसी का गुलाम है,
स्वतन्त्राता दिवस के शुभ अवसर पर जब दहाड़ा ये शेर
फूँक दिया दुश्मनो के इरादों, को कर दिया ढेर रम ढेर ,
चका चौंध रह गई आँखें देख कर ऐसा अनुभवी विद्वान ,
जिसके संघर्ष का नही किया जा सकता व्याख्यान,
तन्मय है वो देश भक्ति में ,आश्वस्त हैं हम उसकी कश्ती में,
भूगर्भ से भी सूंघ लेता है जो दुश्मन की आहाट
भगवान से मिली है उसको ऐसी विरासत,
उस मोदी के मैं गाती हूँ गुणगान
जिसके समक्ष है, हर अविरुध फ़ैसले का समाधान,
चाहे कोई भी हो जात , रोक सकता है वो होता हुआ हर उत्पात,
गरजने से जिसके काँप जाए रिपु ,बरसने पर भस्म हो जाता शत्रु,
हर मियाद पर है वो अटल, सद्गुणों से भरा है जिसका मुखमंडल,
नाद में जिसकी बैठी माँ सरस्वती, इसलिए ठान लेता जो वो करता वही,
हर तर्क का है उसके पास प्रमाण ,उस मोदी का करती हूँ गुणगान ,
चलता गर उत्तर की ओर तो नज़रे रखता दक्षिण पर
यदि कार्य कर रहा हो पूरब में तो ध्यान होता पश्चिम पर,
प्रतिक्षण कार्य करता सिंधु की भाँति ,बेख़ोफ़ बेख़बर चाहे हो कोई भी जाती,
ऐसी है मेरी मोदी की अनोखी मनोवृति ,जिसके समक्ष दुश्मन की निश्चित है शति,
अक्षुण्ण बुने हैं जिसने भारत हित के खवाब
हर परिवेश में दुश्मनों के सवालों का मुँह तोड़ दिया जवाब ,
मानो दिव्या शक्ति हो उसको अर्जित
हर सहचर को अपना बना लेता मंच पर होकर मुखरित ,
अब हो गया आश्वासन परिवर्तित होगा भारत हमारा
हर दिल मे जागेगा मोदी के ख्वाब का उजियारा,
उस मोदी की हूँ मैं भक्त उसका करती हूँ गुणगान
जो लड़ रहा है देश के अत्तताईयों से और कर रहा है सबका परित्रiण …. |

कविता और कहानी