मेरी माँ

मेरी माँ

पुनीता शुक्ला

अगर तुम न होती न होते हम
तुम्हारे वजूद से ही बने हैं हम
न होती ये सांसे, न होता ये दिल,
न दिल कि ये धड़कन न होते हम
अगर तुम न होती ——-

अपनी दुवाएं और ये आँचल
आँचल में लिप्त हुआ ये प्यार
न छोड़ देन इसे कभी, विनती करूँ मै बन्राम्बार
अगर तुम न होती ——-

रास्ते कितने कठिन हों, तुम देना सहारा,
तुम्हारे बिना मै हूँ एक बंजारा
मेरे सिर पर रख दो अपने दोनों हाथ
नहीं चाहिए और कुछ इसके बाद
अगर तुम न होती न होते हम
तुम्हारे वजूद से ही बने हैं हम

कविता और कहानी