लघुकथा- चौकीदार और चोर

लघुकथा- चौकीदार और चोर

रामभरोसे शहर नया-नया आया था।वह एक सड़क से गुजर रहा था। एक सोसायटी के सामने बहुत ही हो हल्ला हो रहा था। काफी भीड़ जमा थी। 

रामभरोसे की भी मामले को जानने की उत्सुकता बढ़ी, वह भीड़ के पास गया और एक आदमी से पूछा, भाई क्या हुआ?

आदमी बोला, कुछ नहीं इस सोसायटी के “चौकीदार” ने “चोर” से साथ मिलकर सारी सोसायटी का चू गाँठ दिया।

रामभरोसे ने गहरी सांस ली और अच्छा कह कर अपनी डगर को हो लिया।

©डॉ. मनोज कुमार “मन”

कविता और कहानी