करोना संकट से भुखमरी के कगार पर खड़ा प्राइवेट शिक्षक !

करोना संकट से भुखमरी के कगार पर खड़ा प्राइवेट शिक्षक !

एक तरफ जहां प्राइवेट , नॉन रेगुलर  और अंशकालिक शिक्षकों को इस भयावह संकट काल में शिक्षण संस्थाओं ने वेतन देने से मना कर दिया है और भुखमरी के कगार पर खड़े ये प्राइवेट अध्यापक आज डिप्रेशन में जी रहे , वहीं दूसरी तरफ सरकार भी इन्हे भूल गई है क्योंकि ना इन्हे बेरोजगारों की श्रेणी में लिया जाता है ना ही ये रोजगार के पंक्ति में खड़े दिखते है ।  ये प्राइवेट शिक्षक जो अपने जी तोड़ मेहनत और अथक परिश्रम के दम पर छात्रों का भविष्य सुधारने के लिए जी जान लगा देते है वो  आज घर पर डिप्रेशन में जी रहे ,बिल्कुल बेबस और चिंतित है वहीं एक बेहद निराशाजनक और दुस्कृत पहलू ये है कि, पूरे लॉक डॉउन में मार्च  से लेकर अगस्त 2020 तक छुट्टी पर चलने वाले महाविद्याओं के नियमित नियुक्त प्रोफसर बकायदा बिना कोई शैक्षिक कार्य किए पूरा वेतन उठा कर मौज काट रहे । उक्त अवधि में कोई शैक्षिक कार्य ना करने वाले  डिग्री कॉलेजों के प्रोफसर अब भी मुस्करा कर घर बैठ इंतजार कर रहे कि कब प्रयागराज हाईकोर्ट फिर से लॉक डॉउन का आदेश कर दें  ताकि मुफ्त  बिना कटौती इन्हे पूरा वेतन मिलता रहे । ऐसे हालात में इस प्रकार आम जनता के टैक्स का पैसा ऐसे देना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है । एक पत्रकार और शिक्षक  होने के नाते मै अंशकालिक और प्राइवेट शिक्षकों का दर्द समझ सकता हूं तथा केन्द्र सरकार से आग्रह करूंगा कि ऐसे सभी नियुक्त शिक्षकों के वेतन का चालीस फीसद वेतन काट कर उन्हे सभी प्राइवेट शिक्षकों के खाते में तत्काल जमा करवाया जाए जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन यापन हो सके ।  स्कूलों , कॉन्वेंट और महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले प्राइवेट एवं अंशकालिक अध्यापक इस महामारी के दौर में भुखमरी की तरफ बढ़ रहे तथा उनके सामने आत्महत्या जैसे हालात बन रहे जो बेहद सोचनीय है  l कई कॉन्वेंट स्कूलों के प्रबंधक उन्हे न तो वेतन दे रहे हैं न ही कोई मदद कर रहे हैं साथ ही प्रदेश सरकार भी उनकी तरफ से अपना मुँह फेर ली है l सबसे शर्म की बात तो यह है कि जिन प्रतिनिधियों को शिक्षक एम एल सी बनाकर विधान परिषद भेजा वे भी अपने परिवार के लोगो को छोड़ चुके हैं और मौज काट रहे l

                उपरोक्त मुद्दे पर सरकार और शिक्षा निदेशालय से मेरी मार्मिक अपील है कि प्राइवेट शिक्षकों के लिए ठोस कदम उठाते हुए उन्हे कुछ आर्थिक मदद मुहैया कराए जिससे वे भी अपने परिवार का भरण पोषण कर सके और उनको भोजन उपलब्ध करा सके । संगठनात्मक एकता की कमी से जूझ रहे ये प्राइवेट शिक्षक आज दिहाड़ी मजदूरी तक करने में असमर्थ है । हम जितने लापरवाह हैं उतने ही अनुशासित भी है । मुश्किल से मुश्किल घड़ी को पार करना, उसे चुनौती देना और उसे मात देना इन अवैतनिक शिक्षकों को आता  हैं। आज जब भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 31 लाख पार कर गई है तो कुछ देश ऐसे भी हैं जहां संक्रमण के मामले गिनती भर के आ रहे हैं ,किन्तु वहां कोई दोहरा रवैया ना पहले था ना अब है । धीरे धीरे जरूर जिंदगी पटरी पर लौट आएगी किन्तु  बड़ी बात यह  है कि हम अपने मध्यम वर्गीय समाज का कितना नुकसान कर देंगे ये सरकार सोच नहीं पा रही ।उम्मीद कीजिए कि हम भी एक दिन कोरोना को पूरी तरह मात देकर फिर से खड़े होंगे, अपने काम-धंधे में जुटेंगे ,मगर इसके लिए जरूरी है कि सतर्क रहें और सभी के लिए समान विचारधारा और नियमावली बनाए । दूसरों को कहते है काम नहीं तो वेतन नहीं और खुद घर बैठ मलाई काट रहे। सरकारें वाट्सऐप यूनिवर्सिटी पर भरोसा न करें, क्योंकि ज्यादातर  लोग इस ऐप पर आए विडियो पर भरोसा कर लेते हैं। हैरत है कि कुछ सरकारी प्रोफेसर  भी वीडियो बना कर आर्थिक विश्लेषण  संबंधी गलत सूचनाएं देते हैं ।

             अभी हमारे सामने कई चुनौतियां हैं। संक्रमण की दर रोज रेकॉर्ड बना रही है। साथ ही लाखों भारतीय इस रोग से तेजी से उबर रहे हैं। रविवार का आंकड़ा है कि करीब 25 लाख लोग इस महामारी से उबर चुके हैं। यह हौसला बढ़ाने वाली खबर है। इसके लिए जरूरी है कि आप नीम हकीमों से बचें। इन दिनों अतार्किक और अवैज्ञानिक बातें करने वाले बहुत से पेशेवर भी आ गए हैं। इनसे सरकार  बचें और सबकी सुध लें । इन दिनों देश में देख रहा हूं कि काफी संख्या में लोग सुरक्षित दूरी का पालन नहीं कर रहे। मास्क नहीं लगा रहे। यह चिंता की बात है। सबको रोजगार और वेतन मिल रहा ऐसे दावे के प्रति  एवं दावे करने वालों से सावधान रहें। प्राइवेट अध्यापकों के अधिकारों के हनन में देश के कुछ बेहद गिरे बुद्घजीवी शिक्षक नेता , प्रोफेसर ,वी सी , मंत्री और गंवार वैज्ञानिक शामिल  हैं। कुछ दावे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होते हैं। जिसे पढ़ कर, सुन कर हम जैसे पत्रकराओं के भी दिमाग चकरा जाते हैं। इससे  शैक्षिक वातावरण और शिक्षा पद्धतियां बर्बाद होती हैं। मेहनत कश अनियमित  शिक्षकों  का हौसला टूटता है। नकारात्मक भाव आपको कमजोर कर देता है। वैसे भी संक्रमण का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है, अगर ये प्राइवेट शिक्षक लामबंद हो गए तो इनके हौसले बेशक सरकार और स्कूल कॉलेज के प्रबंधन  के लिए  चिंता बढ़ाने वाला होगा ।

            ____ पंकज कुमार मिश्रा ( एडिटोरिल कॉलमिस्ट एवं पत्रकार 8808113709)

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