ट्रंप का तमाशा ना बनाओ साधो    (व्यंग्य)

ट्रंप का तमाशा ना बनाओ साधो (व्यंग्य)

आठ दस रंग रोगन दीवारों को देखते हुए जब आप भारत के चमकते केसरिया तोरणद्वार में प्रवेश करते हैं, आप इसे एक पार्क समझ कर तफरीह करने घुसते हैं।  बगल में किसी खलियर आदमी (अरविंद केजरीवाल ) की कभी दिल्ली भी आइए की रिक्वेस्ट होती है जो आपको चाटुकार किंग जैसे किसी वाहियात खेल में साझीदार बनाना चाहते है। क्योंकि  उनके सन्निकट ही खुद को देशभक्त मानने का भ्रम पाले किसी पत्त्थरबाज के लाइव होने की सूचना होती है, जिसे आप किसी छिपे हुए एजेंडे के तहत सबसे पहले कवर कराना चाहते  है। उधर जैसे ही ट्रंप चचा साबरमती आश्रम में पहुंचे तो वहाँ के कर्मचारी ने उन्हें बताया, चचा यही वो चरखा है जिसको चलाने से अंग्रेज फुर्ररर से  भागे थे । अब क्या था चचा की आंखे खुली की खुली रह गई , कभी मर्लियाना के ओर देखते कभी मोदी जी की ओर । ट्रंप चाचा ने कर्मचारी से पूछा:– मतलब इसी चरखे की चर् चर् चर् चर् आवाज सुनकर भाग गया था ब्रिटिश प्रशासन ??

कर्मचारी ने कहा– नहीं नहीं, वो चर् चर् की आवाज तो हमरे दिग्गी बाऊ के लाडले पप्पू भैया  के दादा के ताऊ के  रूम से निकलता था, फिर क्या था ट्रंप चाचा ने नाम पूछ लिया तो उन्हें को गान्धी बाबा के वो 3 बंदर दिखाया गया, बंदर देखकर ट्रंप चाचा ने पूछा- इनमें से ताऊ कौन है ?

ख़ामोश ! इस शब्द का उच्चारण आरंभ करते हुए ,शत्रु चचा ठीक इवांका के बगल से निकले और ट्रंप को समझाते हुए बोले कि – इनमें ताऊ जी नहीं है , ऐ जो मुँह पे हाँथ रखा हुआ बंदर (मनमोहन चच्चा) है ऐ दस जनपद पे रहते थे

और ऐ कान में उँगली पेले जो बंदर है वो सुप्रीमकोर्ट में रहते हैं ,और ऐ जो आँख बंद किया हुआ बंदर है ये देश का हिन्दू  है इसकी प्रजातियाँ पूरे देश में फैली हुई है. । तभी  तीन कन्याएं अपनी लाल स्कूटी में खुद की शक्लों का बेड़ागर्क करते हुए अजीब सी आवाजें निकालते हुए शशि थरूर के साथ उपस्थित हुई ।थरूर अगल बगल देखते हैं, और स्थितिनुरूप जाहिर या बजाहिर तौर पर उन चच्चा को गरिया के आगे बढ़ते हैं , और इवांका के बगल में अपनी तशरीफ़ निकाल के रख देते है ।

 वही मोटेरा स्टेडियम के बगल में  चचा को  दिखाई देती है , जली हुई दाढ़ी ( लावारिस पठान) और कई बुर्के वाली  लक्ष्मीबाई ( शाहीन बाग की बिरयानी वीरांगनाएं ) ,वो भी  सी ए ए ना करने की अपील के तख्ती के साथ, उन्हीं के पास वही दाढ़ी वाले के बगल में  हिन्दू होने के गौरव को याद दिलाते खड़े दिखे श्रीमान उद्धव ठाकरे  ,और फिर वही देश के अर्थव्यस्था का रोना रोने वाले और धरना की  चेतावनी या धमकी देने वाले हमारे देश के भटके युवा और उनके साथ हमारे एफबी अंकल जो बस सबको भक्त भक्त कहते है और खुद हाफिज के पड़ोसी है । इन सबको देख मन धार्मिक सा हो जाता है कसम से। आगे बढ़ते हैं जहाँ आपको फलाना की झुग्गी इस लिए दिखनी है, क्योंकि ढिकाना ने उस पर कमेंट पेल दिया था कि चचा के आने की खुशी में रंग रोगन होए रहा और बदकिस्मती से ढिकाना सलमान खुर्शीद के बड़े वाले दोस्त हैं। आगे कुछ हिमालय की तपस्या के दौरान खोजी गयी विशेष औषधियां जो आपकी जिंदगी एक पल में बदल देने को आतुर हो रही हैं। अब तक आप तफरीह करने के स्तर से सामाजिक जीवन की कुछ वाजिब समस्याओं पर चिंतन के स्तर तक पहुंच चुके हैं ।

इस पिटारे के खुलते ही आप किसी ऐसे सत्य को जान लेते हैं, जो आपके बाप दादाओं ने भी नहीं जाना। कई कब्रें  अचानक से खुल पड़ेंगी और सारे कागज और मुगलिया सच आपसे बांटने लगेंगी। उसके साथ ही आपके ऊपर ढेरों जानकारी इधर से उधर से हमला कर देती हैं जो आपके समस्त इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल के ज्ञान के पायें उखाड़ देते हैं, और आप को खुद पर शर्म आ जाती है कि आपने अपने बाप के करतूतों का गलत इतिहास छिपाकर , अपना समय अरुंधती रॉय को  पढ़ने में फूंक दिए और फूलचंद मास्टर जिससे आपने डंडे खाये थे वो आपको बिना किसी कारण सूतता रहा। आप क्रोधाग्नि में जल रहे हैं।दलित, शोषित, वंचित लोगों की सोने से लदी तस्वीरें सामाजिक न्याय की याचना के साथ आपको पोस्टर में दिखती है जब आप आगरा के ताज का दीदार करने पहुंचते है । ममता दीदी , और कमल हासन जैसे लोग जो रेड डेटा बुक में होंगे उनकी आलोचनाओं के लेख जिसमे उन्हें यूरेशिया भेजने की पूरी तैयारी का खाका होगा वो छी छी करते दिखेंगे । महापुरुषों की खींचतान और नालियों में लथेड़ देने का वृहद कार्यक्रम भी बगल वाले राज्य में चल रहा होगा जहां कमलनाथ जी विराजमान है । विभिन्न नाकाम पार्टियों के छिपे हुए एजेंडे को रंगीन भाषायी जामा पहना कर प्रस्तुत कर देने की होड़ से कार्यक्रम शुरू होता है , ये सब आपको जिज्ञासु राहुल सांकृत्यायन बना देते हैं। फिर आप निकलते हैं सत्य की खोज में, ज्ञान पिपासा बुझाने, ज्ञान के अंतिम छोर की तलाश में। ____ पंकज कुमार मिश्रा जौनपुरी 8808113709

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