सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

सम्पादकीय : मनमोहन शर्मा ‘शरण’

….आखिर चीन बातचीत को तैयार हो गया और आपसी संवाद के माध्यम से समस्या का हल ढूंढने के लिए सहमत हो गया ।
और कोई रास्ता ही नहीं छोड़ा था भारत सरकार ने, हमारे वीर सैनिकों तथा भारतीय सेना के शीर्ष अधिकारीयों ने ।
एक वार वह होता है जो सामने से लगता है और जिसके बचाव के लिए हम अपना रणकौशल दिखाते हैं अथवा दिखा सकते हैं, किंतु भारत की कुशल कूटनीति के फलस्वरूप अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान सहित अनेक शक्तिशाली–समृद्ध देश भारत के साथ आ खड़े हुए जिससे चीन अपने अंदर झांकने लगा और अपना आंकलन करने को मजबूर हो गया । दूसरी तरफ 135 करोड़ भारतवासियों ने आवाज बुलन्द कर दी, बॉय–बॉय चायना, नो मोर चायनीज प्रोडक्ट्स, आत्म निर्भर भारत का मंत्र् गूंजने लगा । भारत ने अधिकांश सरकारी ठेके जो चीन की कंपनियों को दिए थे या दिए जाने थे, रद्द करने का फैसला कर लिया जिससे चीन को बहुत बड़ी आर्थिक हानि उठानी पडेगी और रही सही कसर 59 ऐप को भारत में बैन करने से पूरी कर दी । यह ऐसी लाठी थी जिसकी आवाज कम और चोट गहरी होती है । यह मार्ग भारत ने अन्य देशों को भी दिखा दिया जिसका अनुसरण करने हेतु अमेरिका ने मन भी बना लिया है । अब भारत व चीन (दोनों देशों) ने सैन्य स्तर पर वार्ता प्रारंभ कर दी है जिसका मूल उद्देश्य सीमा तनाव को कम करना है ।
बात यदि कोरोना महामारी की करें (यह भी चीन की ही चाल है ) तो इससे पूरे विश्व की चाल और हालचाल बिगड़ गया और पूरे विश्व में करोड़ों लोग प्रभावित हो गये । भारत की बात करें तो कोरोना मरीजों की संख्या आज 9 लाख के पार पहुंच गई है । समस्या तो बड़ी है ही किन्तु अन्य देशों की तुलना में कोरोना संक्रमित मरीजों के ठीक होने का प्रतिशत भारत में अच्छा है । इसीलिए ठीक होने वालों की संख्या भी 6 लाख के करीब है । दिल्ली में तो यह स्थिति कुछ संभली हुई दिखाई देने लगी है । यहां का रिकवरी रेट 80 प्रतिशत से भी अधिक हो गया है और प्रतिदिन नए मरीजों की संख्या में कमी देखी जा रही है ।
एक समस्या का संक्रमण हम भारतीय राजनीति में भी देख रहे हैं और वो है अपेक्षा, और अधिक पाने की लालसा । जिसका जीता जागता उदाहरण कांग्रेस में कुछ दिनों के अंतराल में देखा जाने लगा है, लेकिन मुझे ऐसा लगता है कि कांग्रेस को युवाओं को साथ लेकर–खुश रखकर चलना होगा यदि वे भारतीय राजनीति में बने रहना चाहते हैं, जो स्वस्थ राजनीति के लिए आवश्यक भी है । मजबूत विपक्ष होने से संतुलन बना रहता है ।

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